Tuesday, March 26, 2013

 होली खेले सरकार 
क्यूँ चिंतित हो बेकार ,,,,,,,,,,,,,,,

दो कोठरियां हुई खाली 
अब किसे परोसे थाली 
अफजल और कसब के बाद 
किसी का तो होगा सत्कार ,,,,,,,,,,,,

क्यूँ चिंतित हो बेकार ,,,,,,,,,,

क्योंकि अब रहा नहीं मैकाले 
इसलिए अबकी मायके वाले 
क्यां करें ,,पद गयी है आदत 
लचर को दिखना है लाचार ,,,,,,,

क्यूँ चिंतित हो बेकार ,,,,,,,,,,

व्यस्त चुनावों में पाकिस्तान 
इसलिए सिस्टम है हैरान 
उन्हें फुर्सत नहीं इस ओर 
हमारी आदत खाना दुत्कार ,,,,,,,

क्यूँ चिंतित हो बेकार ,,,,,,,,,,

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