Sunday, July 5, 2015

भंग के उमंग के तरंग के
झांझ के सितार के मृदंग के
रंग के अबीर के गुलाल के
पल ये संगसाथ के धमाल के

अंग अंग फूलती कुंअर कली
मंद मंद डोलती पवन चली
मन मलय तन प्रलय अनंग के
पल कमल किलोल के कलाल के

[12:11PM, 04/03/2015]

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