सर्जना
Wednesday, February 25, 2009
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क्यूँ आप समझते हैं निज को निर्बल और निसहाय भला जो आग छुपी है हृदय में उसको थोड़ा सा और जला निजता को बचाए रखने से मिलता कोई विस्तार नहीं बीज ब...
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Saturday, February 21, 2009
बिप्लव रख कर मुट्ठी में
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बिप्लव रख कर मुट्ठी में क्रांति लिख देंगे चिट्ठी में भूखों को सम्मानजनक रोटी अनुबंधित हो श्रम शक्ति को उचित मूल्य अवसर अ-बाधित हो दुःख दुविध...
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Thursday, February 19, 2009
तुम्हारी सौगंध
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मधुर प्रीत बेला के अनुपम अनुबंध मथते हैं मन को तुम्हारी सौगंध स्मृति झरोखों पर मलयज सुगंध दृगों में द्रवित प्रिय पीड़ा के बंध पुनः पुनः दृश...
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Wednesday, February 18, 2009
होली ये बोली
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होली ये बोली सुन हमजोली खेल राग की होली अपने मन का डाल न कीचड़ खेलो रंग-रंगोली मौज में झूमे मस्ती में नाचे मस्तानो की टोली आओ खेलें प्रीत क...
Tuesday, February 17, 2009
बहरों पर शब्द न व्यर्थ करो
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गूंगों से मत शास्त्रर्थ करो बहरों पर शब्द न व्यर्थ करो ये टूटी हुई शलाकाएँ ,शेष न इनमें आग कोई लालच के इन पुतलों में,बचा न देशज राग कोई ये ...
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Monday, February 16, 2009
इसी में है समझदारी
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न बनिए झुनझुना झांझर , न बनिए राग दरबारी प्रलोभन हैं बहुत जग में, बड़ी है किंतु खुद्दारी बचा लो संस्कारों को ,इसी में है समझदारी अगर तुम तत्...
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Sunday, February 15, 2009
नीयत और नियति
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नीयत ना बदलेंगे तो फिर नियति भला कैसे बदले नियति वही रहना है तो सरकार बदल कर क्या हासिल ? कुछ लोग बदल जायेंगे बस कुछ समीकरण हों परिवर्तित नह...
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