सर्जना
Wednesday, March 13, 2013
हो सकी इसलिए भ्रष्ट,मति भाई जी सरकार की
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हो सकी इसलिए भ्रष्ट,मति भाई जी सरकार की करके केवल टिप्पणी खाना पूरी हर बार की क्या कोइ उपकरण है कवि जी आपके पास जिसे साध कर ब...
Thursday, March 7, 2013
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जमीं की बात करता हूँ जमीं वालों की बात करता हूँ जिनका वास्ता नहीं वतन से उनसे मुक्का लात करता हूँ जमीर बेच के सर जमीं बेच के जो लोग जे...
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अपने वजूद से मिलना , अपनी ही सांसों में पिघलना बहुत खूब लिख दिया है सफर नामे के साथ चलना बधाई
देख तेरा दीवाना कैसे मारा मारा फिरता है
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देख तेरा दीवाना कैसे मारा मारा फिरता है घर से लेकर घाट तलक ये बेचारा फिरता है चाह में तेरी चातक सा पीहू पीहू रटता है चौराहों से चौब...
Saturday, March 24, 2012
नवसंवतसर शुभाशयाः
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Saturday, February 27, 2010
अप्प होली भव:
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यह होली का समय है। समय के रथ पर बैठकर परिवर्तन आता रहता है एक समय था जब उम्र जताने के लिए देखे हुए बसन्तों की गिनती बताई जाती थी। अब बसन्त द...
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Sunday, January 17, 2010
वसंत पंचमी की शुभ कामनाए
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सरस्वती वंदना भावनाओं में ,कामनाओं में ,शौर्य सुधा भर दे वीणा वादिनी ,मातु शारदे ,,राष्ट्र भक्ति वर दे नीति सन्मति ,सत्य संस्कृति ,सम-आदर ,व...
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