सर्जना
Tuesday, December 4, 2018
गुंचा ए गुलबदन महकता हुआ
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गुंचा ए गुलबदन महकता हुआ जुल्फ से पाजेब तक खनकता हुआ रेशमी रूमाल में अंगार की तरह मोम की नम आंख में दहकता हुआ शहद के स्वाद में है मय ...
मोहब्बते दूरियो का गम नहीं करतीं
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मोहब्बते ये दूरियों का ग़म नहीं करतीं दूरियां मोहब्बतों को कम नहीं करती मैं चाहूं भी तो कैसे रुक के रहूं कहीं हवाएं कोई मुकाम कायम नहीं ...
गर चांदनी उतर कर
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गर चांदनी उतर के दामन से लिपट जाए ऐसे हसीन लम्हें कोई कैसे भूल जाए रिश्ता अजीब है ये तेरा और जमाने का तू आरजू बढ़ाए ये बँदिशे बढ़ाए ...
मेरी जान ले गया
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मेरी जान ले गया है फिर भी है मुझसे रूठा मुझे इंतजार उसका जिसने मुझे है लूटा कह के मुझे अमावस ये भी कहा मिलूंगा मेरे चांद का है वादा सच्...
Monday, December 3, 2018
चांद रूठे या किसी दिन
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चांद रूठे या किसी दिन गम घटा बन छाएगा जब कभी होगी ज़रूरत दिल जलाया जाएगा ऐ खुदा मुझको बना दे तू चरागे - रहगुजर यूं मेरा जलना किसी के काम...
हुई व्यवस्था गुब्बारा
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हुई व्यवस्था गुब्बारा आदर्श हो गए आवारा जिनको आए सुई चुभोना उनकी है बस पो बारा हवाले की हवा निकल गई सेंटकिट्स भी गोल हुआ सूटकेस का पता ...
सब चलता है
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सब चलता है सब चलता है राजनीति के दावानल में सब जलता है सब जलता है चुनाव तक है चर्चा सारी दुश्मन सी जूतम पैजारी फिर तो है मौसेरे भाई ...
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