सर्जना
Wednesday, June 26, 2019
उर्दू एक विशलेषण
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खाद्य वैज्ञानिक अन्वीक्षण अनुसंधान करके यह बताते हैं कि कुछ मिश्रण औषधि बन जाते हैं किंतु कुछ मिश्रण घातक विष बन जाते हैं इस पटल पर भाष...
तू जला दे शौक से ग़रदूं को घर का गम नहीं पर ये वादा कर यहां से रोशनी ले जाएगा तेरे घर चूल्हा जले जलती रहें आंते मेरी मुस्कुरा लूंगा अगर भर पेट तू मुस्काएगा
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तू जला दे शौक से ग़रदूं को घर का गम नहीं पर ये वादा कर यहां से रोशनी ले जाएगा तेरे घर चूल्हा जले जलती रहें आंते मेरी मुस्कुरा लूंगा अगर भर...
Thursday, May 16, 2019
रौशनी के दिए हाथों में लिए
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रौशनी के दिए हाथों में लिए बांटते जाएंगे प्रेम सुरभित सुमन सिंहवीरो की है ये पावन धरा मां भारती तुझे शत शत नमन हम स्वयं ही बने धू...
Tuesday, April 9, 2019
सरस नदी सी बहती हो मेरे मन में रहती हो मैं पत्थऱ घाट किनारे का तुम छ्ल छ्ल छूती रहती हो विहगों सी है ऊंची उड़ान कोकिल कंठी सुर मधुर तान विमल नवल तुम धवल कंवल मैं कंटक युति सांवल सेमल तुम शांत सरल मर्यादा में मुझे पल पल सहती रहती हो हिरण्यमयी द्युतिं कांति किरण मोहक मृदुला मधुहास अरूण तुम हो प्रभात की शुभ बेला में काम क्रोध मद मंद-पुंज मै हूं ज्वर का उत्ताप श्रृंग तुम दल -दल झरती रहती हो स्पर्शो की अनुभूति अंतरतम शीतल करती है तुम सुमन कली सी लज्जा में मैं बौराया सा भंवरा हूं संकोच मोच न हो पाया तुम कल कल करती रहती हो महामना जगुप्त अनुमानित सितम्वर1985-2019अप्रेल
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सरस नदी सी बहती हो मेरे मन में रहती हो मैं पत्थऱ घाट किनारे का तुम छ्ल छ्ल छूती रहती हो विहगों सी है ऊंची उड़ान कोकिल कंठी सुर मधुर तान ...
Thursday, April 4, 2019
जो मिलना है खुदा से ,खुद से मिलने का तजुर्बा कर किसी मजबूर को महफूज करने का तजुर्वा कर मोहब्बत है तो खुलकर सामने आना जरूरी है किसी आशिक की आहों पे मरने का तजुर्वा कर मुलाकातो के जरिए है जरा सा हौसला तो कर हवा भर ले परो मे और उड़ने का तजुर्वा कर कि गुमसुम को तबस्सुम दे दवा बीमार को देकर खुशी पाने ,अना को जज़्ब करने का तजुर्वा कर न यूं गमगीन हो खुद भी न कर माहौल भी वैसा दिलोजां जीतने हैं तो, बिखरने का तजुर्वा कर ये ग़रदूं की गुजारिश है गुजारो शब हमारे संग महकना है तो संदल से लिपटने का तजुर्वा कर
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जो मिलना है खुदा से ,खुद से मिलने का तजुर्बा कर किसी मजबूर को महफूज करने का तजुर्वा कर मोहब्बत है तो खुलकर सामने आना जरूरी है किसी आशिक क...
Sunday, March 24, 2019
क्या गुनें और क्या चुनें
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मन में पीड़ाएं बहुत हैं क्या कहें और क्या सुनें छ्ल रहे हैं हम हमें ही क्या गुनें और क्या चुनें ? छांह तो मिलती है लेकिन राह खो जाती यहां ...
Tuesday, December 4, 2018
गुंचा ए गुलबदन महकता हुआ
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गुंचा ए गुलबदन महकता हुआ जुल्फ से पाजेब तक खनकता हुआ रेशमी रूमाल में अंगार की तरह मोम की नम आंख में दहकता हुआ शहद के स्वाद में है मय ...
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