सर्जना
Tuesday, December 31, 2019
शौक ये उम्रsभर लगाए रहिएमिजाज इश्किया बनाए रहिए बड़ा
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शौक ये उम्रsभर लगाए रहिए मिजाज इश्किया बनाए रहिए बड़ा एहसान आपका होगा हमको सीने से लगाए रहिए बड़ी बारीक है नज़र उनकी उनसे कुछ फासले बनाए रहिए ...
Sunday, August 25, 2019
कारवां ए-तूफां गुजारा कहां है
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बड़े दिनों के बाद अफातु भाषा की एक रचना कारवा ए तूफां गुजारा कहां है अभी संग ढ़ग से उछाला कहां है उड़ जाएगें तमाम हमामों के पर्दे अभी जोश न...
जब से तुमने राम कहा
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जब से तुमने राम कहा , राम हुआ जाता हूं प्रस्तर था सम्मुख तेरे प्रतिमान हुआ जाता हूं उजला उजला कह कर, सारी कालिख धो दी कीचड़ कीचड़ अंगनांई...
Wednesday, June 26, 2019
उर्दू एक विशलेषण
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खाद्य वैज्ञानिक अन्वीक्षण अनुसंधान करके यह बताते हैं कि कुछ मिश्रण औषधि बन जाते हैं किंतु कुछ मिश्रण घातक विष बन जाते हैं इस पटल पर भाष...
तू जला दे शौक से ग़रदूं को घर का गम नहीं पर ये वादा कर यहां से रोशनी ले जाएगा तेरे घर चूल्हा जले जलती रहें आंते मेरी मुस्कुरा लूंगा अगर भर पेट तू मुस्काएगा
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तू जला दे शौक से ग़रदूं को घर का गम नहीं पर ये वादा कर यहां से रोशनी ले जाएगा तेरे घर चूल्हा जले जलती रहें आंते मेरी मुस्कुरा लूंगा अगर भर...
Thursday, May 16, 2019
रौशनी के दिए हाथों में लिए
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रौशनी के दिए हाथों में लिए बांटते जाएंगे प्रेम सुरभित सुमन सिंहवीरो की है ये पावन धरा मां भारती तुझे शत शत नमन हम स्वयं ही बने धू...
Tuesday, April 9, 2019
सरस नदी सी बहती हो मेरे मन में रहती हो मैं पत्थऱ घाट किनारे का तुम छ्ल छ्ल छूती रहती हो विहगों सी है ऊंची उड़ान कोकिल कंठी सुर मधुर तान विमल नवल तुम धवल कंवल मैं कंटक युति सांवल सेमल तुम शांत सरल मर्यादा में मुझे पल पल सहती रहती हो हिरण्यमयी द्युतिं कांति किरण मोहक मृदुला मधुहास अरूण तुम हो प्रभात की शुभ बेला में काम क्रोध मद मंद-पुंज मै हूं ज्वर का उत्ताप श्रृंग तुम दल -दल झरती रहती हो स्पर्शो की अनुभूति अंतरतम शीतल करती है तुम सुमन कली सी लज्जा में मैं बौराया सा भंवरा हूं संकोच मोच न हो पाया तुम कल कल करती रहती हो महामना जगुप्त अनुमानित सितम्वर1985-2019अप्रेल
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सरस नदी सी बहती हो मेरे मन में रहती हो मैं पत्थऱ घाट किनारे का तुम छ्ल छ्ल छूती रहती हो विहगों सी है ऊंची उड़ान कोकिल कंठी सुर मधुर तान ...
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