सर्जना
Friday, June 20, 2025
स्पान्टेनियस फ्लो के तीन गीत
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स्पॉन्टेनियस फ्लो के तीन गीत 1 गीत गाना धन कमाना बस यही तो काम है बेचते हैं वीर रस भी लक्ष्य केवल दाम है । बुझ चुके है प्रज्ञ-चक्षु संवेदना...
Wednesday, May 28, 2025
विनय न मानत जलधि जड़ ये लातो के मीतचाकर से मत आस कर भय बिन होय न प्रीत हम अनुगामी थे शौर्य के सिंहो के आदर्शभेड़ो के अनुगमन के हम कब हुए प्रदर्श करते रहो सवाल कि जब तक स्याही न जाए सूखमृगतृष्णा है आस कि जिनको धन मद पद की भूख
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विनय न मानत जलधि जड़ ये लातो के मीत चाकर से मत आस कर भय बिन होय न प्रीत हम अनुगामी थे शौर्य के सिंहो के आदर्श भेड़ो के अनुगमन के हम कब...
Saturday, May 24, 2025
छू दोगे गर लव से तुम ये कलाम गजल हो जाएगाकरो कुबूल मुहब्बत से ये सलाम गजल हो जाएगा हर इक सीने में इक दिल हर दिल में इक नाम रहेजिस नाम को दोगे अपना दिल वो नाम गजल हो जाएगामिलन के कई बहाने ग़रदूं ईद दीवाली होली हैआओगे जिस काम से मिलने वो काम गजल हो जाएगा
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छू दोगे गर लव से तुम ये कलाम गजल हो जाएगा करो कुबूल मुहब्बत से ये सलाम गजल हो जाएगा हर इक सीने में इक दिल हर दिल में इक नाम रहे जिसको दोगे ...
Tuesday, September 17, 2024
हृदय पटल के पग पग पर सुधियों का मेला है फिर से आ गई होली फिर से मन रंगीला है भंवरे तितली फूल और कलियां सब हैं मस्ती में गली गली मदमाया मौसम डोले बस्ती मेंरंग अबीर घुला रग रग में मन की मौजो में बूढ़ा बरगद बाबू सोना हुआ सजीला हैकीच बना श्रृंगार आज हुड़दंगी टोली कागल गलौच है अलंकार इठलाती बोली काहोड़ ले रहा महलो से उल्लास भी खोली काबाहर तन और अन्तर्मन सब गीला गीला हैपुलक रहा है अंग अंग बिना पिए ही भंगमन करता मनुहार करे कोई आज मुझे भी तंगजीत वार दूं आ दुलार दूं करू न कोई जंगचूक न जाना होली का त्यौहार नशीला है जय होली जय जय प्रहलाद जय रंगोत्सव जय आह्लादआज जोड़ लें टूटे पुल पार करें कर लें संवादराजनीति को हद बतला दें राग राग में करें निनादसमरसता का उत्सव यह कान्हा की लीला हैमम
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पग पग हृदय पटल पर सुधियों का मेला है ऑगन में होली द्वारे पर संत रंगीला है भंवरे तितली फूल और कलियां सब हैं मस्ती में गली गली मदमाया मौसम ड...
Saturday, September 7, 2024
दोहे
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मूरखन के संसार में ज्ञानी की है मौज विज्ञान कला के पीछे भागे जग की फौज अंतर क्या है ठगी से भक्ति का बतलाओ कहे कहे में ना चले करके भी दिख...
Monday, September 2, 2024
एक प्रतिक्रिया
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नजरूल इस्लाम 'की मूर्खतापूर्ण नज़्म पर एक प्रतिक्रिया पढ़ने का समय नहीं है न उत्सुकता न जिज्ञासा शब्द प्रयोग से पहले न जाना अर्थ न प...
कायर कोरी बाते करतेकरते रहते तूम तड़ाकधरें हथेली प्राण होमनेकरें लड़ाके धूम धड़ाकबड़ी बड़ी कविताए लिखतेलिखते बड़े बड़े आलेखलिए चाहना एक हृदय मेंहो जाए कोई उल्लेखमृतक हृदय से निकले अक्षर कैसे प्रेरण दे पाएंगेपंच सितारा के चमगादडक्या रणभेर बजा पाएंगेगाल बजाने वाले गालवगांडीव उठाएंगे कैसे डस आएंगे शत्रु कोबरेपल विपलो में फट्ट फड़ाक
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कायर कोरी बाते करते करते रहते तूम तड़ाक धरें हथेली प्राण होमने करें लड़ाके धूम धड़ाक बड़ी बड़ी कविताए लिखते लिखते बड़े बड़े आलेख लिए चाहना ए...
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