Sunday, July 5, 2015

हम निकट नहीं तो क्या

हम निकट नहीं तो क्या
मै साथ नहीं तो क्या
मेरे हिस्से का टीका
माथे पे सजा लेना
गालों को गुलालो स े
रच लेना भिगो लेना

स्नेह वलय सारे
तुमपर ही निछावर है
स्मृतियों की गागर में
छवियों के सागर हैं
मन के दर्पण में
वह समय जगा लेना
मेरे हिस्से का टीका
माथे पे सजा लेना

त्यौहार ये रंगो का
संजीवन का अवसर
द्वार आ खड़ा है
सत शुभ कॉवर लेकर
जीवन के कटु कल्मष
होली में जला देना
मेरे हिस्से का टीका
माथे पे सजा लेना

रंग भरी भंग भरी शुभकामनाएं

जगदीश गुप्त महामना
[9:49AM, 05/03/2015] jgdis Gupt:



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