Tuesday, June 23, 2009

मै तो उसका समझ रहा था कच्चा पानी
लेकिन वो तो जीत गया करके मनमानी

वो जीता तो सच है,, मुझको बुरा लगा
लेकिन कहा किख़ुद मैंने की थी नादानी

अच्छाहुआ जोउसने अपनी लाज बचाली
आज भले चंगों की नीयत निकली कानी

नमक मिलेगा आटे में तो चल जाएगा
यार हुए, आमादा ..कर डाली शैतानी

हम कैसे उम्र दराज़ हुए? हैरत होती है
अब तक करते मिलते हैं बातें बचकानी

Wednesday, June 10, 2009

असर हम पर न हो जाए जमाना है बदलने का
सफर है जिंदगी भर का ,है वादा साथ चलने का

मुसीबत ने बयां कर दी मुसीबत रिश्ते नातों की
बहाना ढूंढते हैं दोस्त, कतरा... के निकलने का

नजरफिसली नआई काम में फ़िरकोई होसियारी
नहीं मौका मिला अब के जरा सा भी संभलने का

नदी सूखी.पड़ी है, अब परिंदे ,क्या करें ?आकर
हवाओं में जलन है,,ये नहीं मौसम ,टहलने का

गुफ्तगू बा अमल कर दे बना कुछ कायदा ऐसा
यही एक रास्ता बचता है दिल की गांठ खुलने का

Friday, May 29, 2009

  • जख्म न छेड़े आँसू हैं बेताब छलकने लगते हैं

सूखे फूल किताबों में ही रख्खे अच्छे लगते हैं

  • दरिया ऐ गम इन आंखों से किसने बहते देखा है

बड़ी उम्र वाले भी दुःख में मासूम से बच्चे लगते हैं

  • वक्त नहीं मिलता यारों को जीवन के जंजालों से

वे सच्चे होकर हंसते हैं तो कितने अच्छे लगते हैं

  • नही चाहिए किसी की दौलत न कोई दे पाया है

प्यार के दो बोल अय गर्दूं कितने मीठे लगते हैं

  • बिना इबादत इमारतें सब मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे

जिनको नूरऐखुदा मिला उनको सब एक ही लगते हैं

Sunday, May 10, 2009

बहोत अंधेरा घिर आया है दिल की राहों में
जलाओं दीप मोहब्बत के तुम निगाहों में

हुज़ुमे गम है चुभन दिल में नमी आंखों में
लोग डूबे हैं अंधेरों में सुरुरों में औ अनाओं में

करूं निसार हजार बार ये जिंदगी तुझ पर
दौर ऐ गर्दिश में भी जीता रहा वफाओं में

हर तरफ तंज़ कहीं रंज ,है बदगुमानी कहीं
सुकूने ऐ दिल की तलब है मेरी सदाओं में

संभलो तहजीब पे हमलों का दौर है गर्दूं
बहोत है दर्दे वतन मरहम चढाओ घावों में

बहोत अँधेरा घिर आया है दिल की राहों में

बहोत अँधेरा घिर आया है दिल की राहों में

जलाओ दीप मोहब्बत के तुम निगाहों में


हुज़ुमे गम है चुभन दिल में नमीं आंखों में

लोग डूबे हैं अंधेरों में सुरुरों में अनाओं में


करूं निसार हजार बार ये जिंदगी तुझ पर

दौरे गर्दिश में भी जीता... रहा वफाओं में


हर तरफ तंज कहीं रंज, है बदगुमानी कहीं

सुकून दिल की तलब है मेरी सदाओं में


सम्भलो तहजीब पे हमलों का दौर है यारो

बहोत है दर्द वतन मरहम चढाओ ग्घवों में में

Tuesday, May 5, 2009

किसीको चाँदी किसीको सोना
जीवन,कुछ पाना,कुछ खोना

संग संग तदबीर-ओ-मुक़द्दर
जीवन कुछ हँसना कुछ रोना

लम्हा लम्हा रूप बदलता
जीवन कटना उगना बोना

नाव सवारी के सर पर है
जीवन है जीवन को ढोना

"गर्दूं" ने जीवन भर ढूँढा
जीवन है अँधियारा कोना



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