Monday, August 28, 2023

यहां हर एक अंधा है कोई भक्ति में कोई विरोध में यहां हर एक गुलाम है कोई प्रमाद का कोई विषाद कायहां हर एक विवादी हैकोई वादी है कोई प्रतिवादी हैपर संतुलित नहीं है कोईसमाधान का हिस्सा नहीं होना चाहता कोईक्यों कि सबको पता है वो स्वयं ही अपने स्थान पर अपनों के लिए समस्या हैजिस दिन आप होने लगेंगें समाधान का हिस्साआपके आसपास सौंदर्यमय जीवन जन्मने बढ़ने लगेगा शेष दुनिया के नर्क में भी आपकी प्रेरणा जाती रहेगी

यहां हर एक अंधा है 
कोई भक्ति में कोई विरोध में 
यहां हर एक गुलाम है 
कोई प्रमाद का कोई विषाद का
यहां हर एक विवादी है
कोई वादी है कोई प्रतिवादी है
पर संतुलित नहीं है कोई
समाधान का हिस्सा नहीं होना चाहता कोई
क्यों कि सबको पता है 
वो स्वयं ही अपने स्थान पर अपनों के लिए समस्या है
जिस दिन आप होने लगेंगें समाधान का हिस्सा
आपके आसपास सौंदर्यमय जीवन जन्मने बढ़ने लगेगा 
शेष दुनिया के नर्क में भी आपकी प्रेरणा जाती रहेगी

28 august 2022 फेसबुक पर पोस्ट

Tuesday, August 22, 2023

लालकिला / मणिपुर/ सियासत

लालकिला / मणिपुर/ सियासत

मेले हैं झमेले हैं अकेले हैं यहां इस दुनियादारी में
बहुत कुछ, रखना पड़ता है, यहां पर पर्दादारी में

तौल-ले-बोल तभी मुंह खोल इल्मदां आए हैं  कहते
सियासत कब जला दे क्या ? तेरी, ईमानदारी में 

वो आए घर,बराएशौक,किया सिजदा,दिया सदका 
तोहमतें,, नाम कर दी, फिर ,मेरी तीमारदारी में

सांप की बस्तियों में ,खोल ,दरखिड़कियां रखिए
इरादा जो भी हो ,शक है ,सलह में ,समझदारी में

तोडेगा न छोड़ेगा  , रहे कोई , दोस्त  या  दुश्मन 
सियासत दुश्मनों से ,और मुहब्बत फूल  यारी में 

ग़रदू
22अगस्त 23 को फेसबुक पर प्रकाशित

प्रिय अभिषेक प्रिय के लिए

अहो विकट
प्रिय मधु मादक 
हास्य चेतना एक साथ
अद्भुत विवेक का यह विलास
सुर ताल गति नव नवल छंद
सुरभित मकरित मृदु हास छंद
गाता शिक्षा का कुरुज्ञान 
ऐसी पींगें ऐसी उड़ान
छोटा न हो जाए वितान
समकालिक समर्थ रचना महान
कवि का कुल का हो यशोगान
धन्य धन्य अभिषेक तान

महामना के उद्गार
फेसबुक पर 22/अगस्त2021 को प्रकाशित

Friday, July 21, 2023

जीवन नहीं रुका करते है कुछ जीवन रूक जाने सेगरलपान कर अमिय बॉटने का संकल्प और दृढ़ होयद्यपि वह वीभत्स देखकर सिहर गया मन सहमा हैउधर गिरे इक माँ के आँसू इधर कई आँचल भीगेपांचाली का अपराधी, क्या केवल दुर्योधन था यामोह मदांध शकुनि के पांसो में फंसे युधिष्ठिर भीमूल्यों का संस्थापन करने अब समाज मन सुदृढ़ हो अच्छा है तुम्हें ग्लानि जगी , क्यों कि तुम संस्कारी होठगी गई बालाओं पर भी कभी पसीजा क्या मन यहसभ्यताओं पर क्रोध करो जिनका जीवन व्यभिचारी हैदिशाबोध दे करो नियंत्रण आपराधिक यह लाचारी हैसंकल्प करो दंडित करने का शौर्य हमारा सुदृढ़ होबहिष्कार है कायरता कुछ वीरोचित आभियान करोकृष्ण राम की तरह क्रूर अन्यायी पर संधान करो कुछ अर्जुन तैयार करो कुछ भीम भूमि पर खड़े करोमन विस्तार करो स्व का ,मत स्वांतसुखाय सिकुड़ रहोस्वयंप्रभा से करो समुज्ज्वल जगती का सम्बल सुदृढ़ होमम

जीवन नहीं रुका करते है कुछ जीवन रूक जाने से
गरलपान कर अमिय बॉटने का संकल्प और दृढ़ हो

यद्यपि वह वीभत्स देखकर सिहर गया मन सहमा है
उधर गिरे इक माँ के आँसू  इधर कई आँचल भीगे
पांचाली का अपराधी, क्या केवल दुर्योधन था या
मोह मदांध शकुनि के पांसो में फंसे युधिष्ठिर भी
मूल्यों का संस्थापन करने अब समाज मन सुदृढ़ हो 

अच्छा है तुम्हें ग्लानि जगी , क्यों कि तुम संस्कारी हो
ठगी गई बालाओं पर भी कभी पसीजा क्या मन यह
सभ्यताओं पर क्रोध करो जिनका जीवन व्यभिचारी है
दिशाबोध दे करो नियंत्रण आपराधिक यह लाचारी है
संकल्प करो दंडित करने का  शौर्य हमारा सुदृढ़ हो

बहिष्कार है कायरता कुछ वीरोचित आभियान करो
कृष्ण राम की तरह क्रूर अन्यायी पर संधान करो 
कुछ अर्जुन तैयार करो कुछ भीम भूमि पर खड़े करो
मन विस्तार करो स्व का ,मत स्वांतसुखाय सिकुड़ रहो
स्वयंप्रभा से करो समुज्ज्वल जगती का सम्बल सुदृढ़ हो

मम

दुनिया की सेहत को अच्छे रंग बिरंगे लोगलेकिन नहीं चाहिए भैया रंग बदलते लोग

दुनिया की सेहत को अच्छे रंग बिरंगे लोग
लेकिन नहीं चाहिए भैया रंग बदलते लोग

Monday, May 22, 2023

आप चाहेंगे तो गाएंगे गीत वे आएगी गंध जिनमें बस प्रेम कीआप चाहेगें तो गाऐंगे मेघ वे_ बरसे जो नयनों से बरसों- बरसगाती कोयल फुदकती गौरैया मिलीजब आए कोई देने दाना उन्हेंपाईं राधा की मीरा की अनुभूतियांजब जब मिले जैसे कान्हा उन्हेंआप कह दें तो कह दूं सभी उलझनेजो सुलझांई हैं तुमने बरसो बरसप्रेम पल भर का भी होता है अमरजिसका परिणाम जग को मधुमय मिलेसौ गुना भाग्य है उस हृदय का अहोजिसमें रहने की इच्छा तुम्हारी जगेभाग्यशाली हैँ वे चाँद तारे सभी जो तकते रहे तुमको बरसों बरसआज भी तुम टटोलो अपने हृदयएक मूरत मिले खिलखिलाती हुईजिसपे तुम भी चढ़ाए, शतदलकमल फूलो के दल रानी चंपा जुही भीगता ही रहा ,पर कह न सकाएक बदली से मन की बरसों बरसमहामना

आप चाहेगें तो आएंगे मेघ वे_ 
आएगी गंध जिनमें बस प्रेम की
आप चाहेंगे तो गाएंगे गीत वे 
बरसे जो नयनों से बरसों- बरस

गाती कोयल फुदकती गौरैया मिली
जब आए कोई देने दाना उन्हें
पाईं राधा की मीरा की अनुभूतियां
जब जब मिले जैसे कान्हा उन्हें
आप कह दें तो कह दूं सभी उलझने
जो सुलझांई हैं तुमने बरसो बरस

प्रेम पल भर का भी होता है अमर
जिसका परिणाम जग को मधुमय मिले
सौ गुना भाग्य है उस हृदय का अहो
जिसमें रहने की इच्छा तुम्हारी जगे
भाग्यशाली हैँ वे चाँद तारे सभी 
जो तकते रहे तुमको  बरसों बरस

आज भी तुम टटोलो  अपने हृदय
एक मूरत मिले  खिलखिलाती हुई
जिसपे तुम भी चढ़ाए, शतदलकमल 
 फूलो के दल रानी चंपा जुही 
भीगता ही रहा ,पर कह न सका
एक बदली से मन की बरसों बरस

महामना

Friday, March 31, 2023

संसार तो छलिया है अंधेर है डगर डगरकीच और काँटों से निज को ही बचना हैपग पग पे प्रलोभन हैं फूलो में हैँ नाग बसेया तो शिव होना है या संभल निकलना हैआभार भार होता उपहार हार होताकिसकी है नीयत कैसी यह आप समझना हैमहामना

कहते तो यही हैं सब यह ईश की रचना है 
धूप छाँव सुख दुख हमको ही चखना है 
संसार तो छलिया है अंधेर है डगर डगर
कीच और काँटों से निज को ही बचना है
पग पग पे प्रलोभन हैं फूलो में हैँ नाग बसे
या तो शिव होना है या संभल निकलना है
आभार भार होता उपहार हार होता
किसकी है नीयत कैसी यह आप समझना है
महामना

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