Monday, March 9, 2009

नजर में हूर उतरे और सुखन से नूर बरसे
मुकाबिल हो अगर गर्दूं समझ लेना कि होली है
बधाई रंग-ऐ-मौसम की हवाएं गोद भर लायें
कलम जब रंग बरसाए ,समझ लेना कि होली है

8 comments:

  1. नीरज ने भी समझाया
    आपने भी समझाया
    नासमझ इतने कि
    फिर भी समझ न आया.
    अकड़ -पकड़ जब रंग पड़े,
    घिस-घिस उन्हें छुड़ाया
    नींद खुमारी जब उतरी
    तब समझा ये तो "हो" ली.

    होली पर हमारी हार्दिक शुभकामनाये .

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  2. होली की मुबारकबाद,पिछले कई दिनों से हम एक श्रंखला चला रहे हैं "रंग बरसे आप झूमे " आज उसके समापन अवसर पर हम आपको होली मनाने अपने ब्लॉग पर आमंत्रित करते हैं .अपनी अपनी डगर । उम्मीद है आप आकर रंगों का एहसास करेंगे और अपने विचारों से हमें अवगत कराएंगे .sarparast.blogspot.com

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  3. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  4. bahut sunder abhivyakti hai holi mubarak

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  5. होली की हार्दिक् शुभकामनाएं।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  6. सादर अभिवादन
    आपकी रचना पढना बहुत अच्छा अनुभव रहा
    रंगो के इस त्यौहार पर सह्रिदय
    असीम शुभकामनाएं ...

    एक मुक्तक परिचय का ..

    हमारी कोशिशें हैं इस , अन्धेरे को मिटाने की
    हमारी कोशिशें हैं इस , धरा को जगमगाने की
    हमारी आंख ने काफ़ी बडा सा ख्वाब देखा है
    हमारी कोशिशें हैं इक , नया सूरज उगाने की

    और

    तीन मुक्तक होली पर

    लगें छलकने इतनी खुशियां , बरसें सबकी झोली मे
    बीते वक्त सभी का जमकर , हंसने और ठिठोली मे
    लगा रहे जो इस होली से , आने वाली होली तक
    ऐसा कोई रंग लगाया , जाये अबके होली मे



    नजरें उठाओ अपनी सब आस पास यारों
    इस बार रह न जाये कोई उदास यारों
    सच मायने मे होली ,तब जा के हो सकेगी
    जब एक सा दिखेगा , हर आम-खास यारों

    और

    मौज मस्ती , ढेर सा हुडदंग होना चाहिये
    नाच गाना , ढोल ताशे , चंग होन चाहिये
    कोई ऊंचा ,कोई नीचा , और छोटा कुछ नही
    हर किसी का एक जैसा रंग होना चाहिये




    शुभकामनाओ सहित
    डा. उदय मणि
    http://mainsamayhun.blogspot.com

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  7. ब्लाग संसार में आपका स्वागत है। लेखन में निरंतरता बनाये रखकर हिन्दी भाषा के विकास में अपना योगदान दें।
    नये रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को shabdkar@gmail.com पर रचनायें भेज सहयोग करें।
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

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