Friday, May 29, 2009

  • जख्म न छेड़े आँसू हैं बेताब छलकने लगते हैं

सूखे फूल किताबों में ही रख्खे अच्छे लगते हैं

  • दरिया ऐ गम इन आंखों से किसने बहते देखा है

बड़ी उम्र वाले भी दुःख में मासूम से बच्चे लगते हैं

  • वक्त नहीं मिलता यारों को जीवन के जंजालों से

वे सच्चे होकर हंसते हैं तो कितने अच्छे लगते हैं

  • नही चाहिए किसी की दौलत न कोई दे पाया है

प्यार के दो बोल अय गर्दूं कितने मीठे लगते हैं

  • बिना इबादत इमारतें सब मन्दिर मस्जिद गुरूद्वारे

जिनको नूरऐखुदा मिला उनको सब एक ही लगते हैं

Sunday, May 10, 2009

बहोत अंधेरा घिर आया है दिल की राहों में
जलाओं दीप मोहब्बत के तुम निगाहों में

हुज़ुमे गम है चुभन दिल में नमी आंखों में
लोग डूबे हैं अंधेरों में सुरुरों में औ अनाओं में

करूं निसार हजार बार ये जिंदगी तुझ पर
दौर ऐ गर्दिश में भी जीता रहा वफाओं में

हर तरफ तंज़ कहीं रंज ,है बदगुमानी कहीं
सुकूने ऐ दिल की तलब है मेरी सदाओं में

संभलो तहजीब पे हमलों का दौर है गर्दूं
बहोत है दर्दे वतन मरहम चढाओ घावों में

Tuesday, May 5, 2009

किसीको चाँदी किसीको सोना
जीवन,कुछ पाना,कुछ खोना

संग संग तदबीर-ओ-मुक़द्दर
जीवन कुछ हँसना कुछ रोना

लम्हा लम्हा रूप बदलता
जीवन कटना उगना बोना

नाव सवारी के सर पर है
जीवन है जीवन को ढोना

"गर्दूं" ने जीवन भर ढूँढा
जीवन है अँधियारा कोना



LinkWithin

विजेट आपके ब्लॉग पर