Sunday, September 20, 2009


बतियाने से समय कटेगा ,
कदम उठें तो बात बनेगी

सोये रहजाना उचित नहीं ,

मत सोच कि कोई खरा नहीं
लहरों पर भी करो सवारी,,,,

उड़ना भी कुछ बुरा नही ।
किंतु न अपनी धरती छूटे,,

न जगती का छूटे मान
शत्रु से यदि रार न ठानी ,

रार स्वयं से आन ठनेगी

अन्यायी से मेल न करना ,

शक्तिमन्त्र को सदा पालना
बीज विजय का ,गीत प्रीत के ,

ऊँचें सपनों को सम्हालना
सज्जन शक्ति का संचय और

मदमत्ता का रखना ध्यान
किंचित भ्रम में मत रहना ,

धरती कोई अवतार जनेगी

खामोशी के अपने गहरे माने होते हैं
जिन पर इसकी रहमत हो मस्ताने होते हैं

गिरते हैं कहकहे अचानक जब ठोकर खा कर
तब ही हम अपनी हस्ती पहचाने होते हैं

यारा दौरे दौड़ भाग की उलझन में तुम हो
पर जुबान पर दुनिया की तो ताने होते हैं

जब बन्दों का मिलन खुदाई से हो जाता है
तब किस्मत में सर्वत से बतियाने होते हैं

तेरी शोखी ,बिल्कुल जैसे धूप चटखती है
इसमे गाफिल गर्दू सब दीवाने होते हैं

Thursday, September 10, 2009

सीधी सच्ची बात

करे खनकती हंसी उजागर तुम भी खूब समझती हो
सीधी सच्ची बात कहूं तुम मुझ को अच्छी लगती हो


इन्द्रधनुष का रूप सजीला बारिश की बातें रिमझिम
साँझ सुहानी भोर सुनहरी पूनम रात बिखरती हो


चन्दन केशर नाग मुश्क का असर अर्श तक जा पहुंचे
उतरे हर धड़कन में सावन जब तुम साँझ संवरती हो


कच्ची है कचनार मगर ,,आँखों में शरारत आ बैठी
रह रह कर तुम बार बार छू छू के नज़र, गुजरती हो

गर्दूं भरने लगा कुलांचें ,,,,,हसरत ने पर फैलाये
ख्वाव ले रहे अंगडाई पर ,,,शायद शर्म ,मुकरती हो

Sunday, September 6, 2009

लहर


पलट कर जब समंदर में ,लहर यादों की आती है
बहकता है ये दिल मेरा ,नजर जब मुस्कुराती है


अंधेरे बंद कमरें में ,अचानक रोशनी करके
हर इक तहजीब से आगे ,हवा में गुदगुदी करके
घुली लम्हों में खुशबू सी ,शरारत गीत गाती है

पलट कर जब ................

दुआएं साफ दिखतीं हैं ,तेरे खामोश ओंठों पर
लरजता द्वार तक आँगन , तुम्हारी एक आहट पर
मुसलसल ये वफ़ा दिलवर ,मेरे अरमां जगाती है
पलट कर जब ...............

अकेले कैक्टस पर फूल की ,इस मेहरबानी का
नवाजिश आपकी ,बेइंतिहा ,,,,इस कद्रदानी का
'ये आराइश ये रौनक इस नजर में झिलमिलाती है.

पलट कर जब ................

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