Sunday, September 20, 2009

खामोशी के अपने गहरे माने होते हैं
जिन पर इसकी रहमत हो मस्ताने होते हैं

गिरते हैं कहकहे अचानक जब ठोकर खा कर
तब ही हम अपनी हस्ती पहचाने होते हैं

यारा दौरे दौड़ भाग की उलझन में तुम हो
पर जुबान पर दुनिया की तो ताने होते हैं

जब बन्दों का मिलन खुदाई से हो जाता है
तब किस्मत में सर्वत से बतियाने होते हैं

तेरी शोखी ,बिल्कुल जैसे धूप चटखती है
इसमे गाफिल गर्दू सब दीवाने होते हैं

3 comments:

  1. waah kya bat hai behad sunder or artpoorn rachna hai padhkar maja aa gaya sach me

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  2. अभी परेशां हूँ जरा
    मत मुझे और डरा

    आँख की आबरू हूँ
    जमीं पे मत ही गिरा

    तंग अब और न कर
    सर पे चल हाथ फिरा

    बहुत मिजाज़ हुए चल
    कल के कल काम सरा

    जबसे बे निगहेबानी हुई
    कल मरा या आज मरा

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  3. belated happy festive season ............

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