मनोज भाई
यह गजल आपको समर्पित कर रहा हूँ
आंखों के सामने नहीं दिल में ख्याल में
हरदम रहा वो साथ ,खुशी में मलाल में
जागी जो रात साथ, बुरा मान गया दिन
शक हो गया खलल का हक में हलाल में
उल्फत के राग मैंने आंखों से सुन लिए
खोया हुआ था वोमेरे खत में ख्याल में
सुलगता हुआ मिला ,हंसता हुआ सितारा
बैचेन हो रहा था , ...खुदी के सवाल में
गर्दूं को बहुत ढूंढा , .अब जाके मिला है
बैठा हुआ था बन्दा कबीर-ओ-जमाल में
किताब मिली - शुक्रिया - 22
4 months ago