Sunday, July 5, 2015




साहित्य हमारा साधन सारस्वतजन संसाधन
निश्चित है लक्ष्य हमारा भारत को विश्व सिंहासन

पग पग पर नीर बदलता पग पग बदले भाषाएँ
एक सूत्र हम सब का योगी हों दसों दिशाये
हम प्रज्ञा के अर्चक हैं, हम नीति के निर्माता
हम ऋषि तत्व के साधक हम भारत भाग्य विधाता
संस्कृति उत्थान करेंगे जय मंगल गान करेंगे
गूंजेगा सकल जगत मेँ भारत का विधि अनुशासन

साहित्य हमारा साधन सारस्वतजन संसाधन
निश्चित है लक्ष्य हमारा भारत को विश्व सिंहासन

निज गौरव की विस्मृति से,हा! हतबल राष्ट्र हमारा
निर्बलता का कारण है ,यह जाति पंथ बंटवारा
निर्वीर्य हुए सौ  कोटि ,तज धर्माधारित जीवन
दु:खों से मुक्त न कोई , बालापन वृद्धा यौवन
अंतर की त्याग मलिनता ,बाहर करने अरिमर्दन
संकल्पित तेज जगाने ,करना है धर्म -स्थापन

साहित्य हमारा साधन सारस्वतजन संसाधन
निश्चित है लक्ष्य हमारा भारत को विश्व सिंहासन


3:52PM, 16/02/2015] jgdis Gupt:महामना




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